ओस्लो। नॉर्वे के एक एंटी-इमिग्रेशन समूह की इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है। इस संगठन के एक सदस्य जोहान स्लातिविक ने एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की, जिसे देखकर एक पल को यह गलतफहमी होती है कि वह सीट नहीं, बुर्का पहनकर बैठी मुस्लिम महिलाएं हैं। यह एक खाली बस की तस्वीर है, लेकिन ‘फादरलैंड फर्स्ट’ नाम के एक संगठन से जुड़े जोहान ने इस तस्वीर को ऐसे पेश किया कि लोगों को भी गलतफहमी हो गई। जोहान को तस्वीर की असलियत मालूम थी, लेकिन उनका कहना है कि लोगों की प्रतिक्रिया देखने के लिए उन्होंने यह फोटो शेयर की। जोहान ने यह तस्वील सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। इसे ‘फादरलैंड फर्स्ट’ के फेसबुक पेज पर साझा किया। इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा था, ‘इसके बारे में लोग क्या सोचते हैं?’ तस्वीर देखकर कई लोगों को लगा कि बस के अंदर 6 बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएं बैठी हैं।
इस पेज के साथ 13,000 से भी ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। इस तस्वीर के कारण मुस्लिम समुदाय और बुर्के पर लंबी-चौड़ी बहस शुरू हो गई। कई अन्य लोगों को भी लगा कि बस के अंदर मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनकर बैठी हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग इमिग्रेशन का विरोध करते हुए बुर्के पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग करने लगे। लोग बुर्के को ‘डरावना’ बताने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘यह बहुत डरावना दिख रहा है। इसपर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।’ एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘आप कभी नहीं जान सकते कि बुर्के के अंदर कौन है। कोई हथियारबंद आतंकवादी भी बुर्के में छुप सकता है।’ मालूम हो कि मुस्लिम देशों से बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों के कारण यूरोपीय देशों में एंटी इमिग्रेशन बहस छिड़ी हुई है। यूरोप के कई देशों में तो बुर्का और हिजाब पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है।
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