नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के आईएएस बाबूलाल अग्रवाल को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। बाबूलाल 1988 बैच के आईएएस थे और उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत थे। दरअसल, इन पर सीबीआई में चल रहे मामले को खत्म करने के लिए पीएमओ के अफसरों को रिश्वत देने का आरोप है। अग्रवाल का नाम उस समय सामने आया था जब 2010 में पहली बार आय से अधिक संपत्ति को लेकर आयकर विभाग ने कार्रवाई की थी। उन्होंने रायपुर जिले के खरोरा में 220 किसानों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और उनमें भारी निवेश किया। छापे के दौरान उनकी कुल संपत्ति 253 करोड़ रुपए की आंकी गई। वहीं, 85 लाख रुपए का बीमा कवर मिला था।
इस कार्रवाई को उन्होंने पक्षपातपूर्ण करार दिया है। अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल उन्हें आर्डर की कॉपी नहीं मिली है, लेकिन यदि इस तरह की कार्रवाई मुझ पर हो रही है, तो देश में दूसरे ऐसे और अधिकारी हैं, जिन पर कार्रवाई होनी चाहिए। 29 साल की मेरी सर्विस में मेरा परफार्मेंस आउटस्टैंडिंग रहा है। आउटस्टैंडिग सीआर है। मैंने सीबीआई की कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी है। मामला कोर्ट में विचााधीन है, ऐसे में ये कार्यवाही भेदभावपूर्ण नजर आती है। चेहरा छांट-छांटकर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया।
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