रायपुर: मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गंभीर बीमारियों से पीडि़त वरिष्ठ नागरिकों की बेहतर देखभाल और उनके इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ पहल की है और समाज कल्याण विभाग को  प्रशामक देख-रेख गृहों की स्थापना के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देशों के अनुरूप समाज कल्याण विभाग ने यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से संचालक, समाज कल्याण संचालनालय को परिपत्र जारी किया है। विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रशामक देख-रेख गृहों का संचालन समाज कल्याण कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त अशासकीय स्वैच्छिक संगठनों, त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं अथवा नगरीय निकायों के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए निर्धारित नियम-प्रक्रिया के अनुसार विभागीय अनुदान भी मिलेगा। त्रि-स्तरीय पंचायतों और नगरीय निकायों को शत-प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  

    परिपत्र में कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा वृद्धावस्था के कारण गंभीर बीमारी जैसे डेमेन्शिया और बिस्तर पर निष्क्रिय अवस्था में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा सुविधा देने और उनकी देख-रेख के लिए प्रशामक देख-रेख गृह स्थापना का निर्णय लिया। प्रशामक देख-रेख गृह में 60 साल या उससे अधिक उम्र के ऐसे वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की जाएगी, जिन्हें वृद्धावस्था में गंभीर बीमारी के कारण अपनी सम्पूर्ण दिनचर्या और क्रियाकलाप के लिए बिस्तर में रहने को बाध्य होना पड़ता है। प्रशामक देख-रेख गृहों का संचालन समाज कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त अशासकीय स्वैच्छिक संगठनों द्वारा अथवा त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत) अथवा नगरीय निकायों के माध्यम से किया जाएगा। 
    समाज कल्याण विभाग के परिपत्र में बताया गया है कि प्रशामक देख-रेख गृहों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को चाय-नाश्ता, भोजन, वस्त्र, तेल, साबुन, इलाज और दवाईयों आदि की सुविधाएं दी जाएंगी। उनके लिए वहां मनोरंजन, खेल, पत्र-पत्रिकाओं के साथ टेलिविजन की भी व्यवस्था रहेगी। उनके लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक के लिए प्रशामक देख-रेख गृह में अलग-अलग बिस्तर, पलंग और मच्छरदानी की व्यवस्था की जाएगी। उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था होगी। प्रशामक देख-रेख गृह के परिसर में बगीचा भी रहेगा। 
    परिपत्र के अनुसार प्रत्येक प्रशामक देख-रेख गृह में पर्याप्त रौशनी, शीतल और स्वच्छ पेयजल तथा बैठने के लिए आरामदायक फर्नीचर की भी व्यवस्था की जाएगी। प्रशामक देख-रेख गृह में संस्था द्वारा कलेक्टर अथवा संबंधित जिले के समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक अथवा उप संचालक की अनुशंसा से हितग्राही को प्रवेश दिया जाएगा और उनका बायोडाटा भी रखा जाएगा। किसी अन्तःवासी (हितग्राही) की मृत्यु होने पर अगर उनके परिवार का कोई भी सदस्य 24 घंटे के भीतर उनके पार्थिव शरीर को लेने के लिए उपस्थित नहीं होंगे, तो दिवंगत के धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। परिपत्र में यह भी बताया गया है कि प्रशामक देख-रेख गृह का संचालन करने के लिए अनुदान उन संस्थाओं को मिलेगा, जिन्हें कम से कम तीन साल से वृद्धाश्रम अथवा बहु-सेवा केन्द्र के संचालन का अनुभव हो। विभागीय मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा से समाज कल्याण कल्याण संचालनालय को भेजे जाएंगे, जिनका परीक्षण अनुदान नियमों के अनुसार किया जाएगा। इनके संचालन के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को शत-प्रतिशत अनुदान मिलेगा। 
    प्रत्येक प्रशामक गृह में डॉक्टर, अधीक्षक, योग प्रशिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, नर्स, रसोईया, भृत्य-सह-चौकीदार, स्वीपर और केयर टेकर भी रखना होगा, जिनकी शैक्षणिक योग्यता और जिम्मेदारी के बारे में भी समाज कल्याण विभाग के परिपत्र में जानकारी दी गई है। प्रशामक देख-रेख गृहों में ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक अथवा होम्योपैथिक डॉक्टर रखे जा सकेंगे। वहां काम करने के लिए डॉक्टर को एमबीबीएस अथवा बीएएमएस या बीएचएमएस होना चाहिए। उनका निवास संबंधित प्रशामक देख-रेख गृह के नजदीक होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में भी वे संबंधित वरिष्ठ नागरिक का इलाज कर सके। अधीक्षक की शैक्षणिक योग्यता स्नातक रखी गई है। इसी तरह योग प्रशिक्षक के लिए योग में डिप्लोमा होना चाहिए।